कल्पना कीजिए।रात के 9 बजे हैं। शहर में अंधेरा है। लेकिन किसी सोलर फार्म पर अचानक दिन जैसा उजाला हो जाता है। न कोई सूरज उगा है।न कोई बिजली का बल्ब जला है। यह रोशनी सीधे अंतरिक्ष से आ रही है। सुनने में साइंस फिक्शन लगता है, लेकिन अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में एक स्टार्टअप इसे…
Category: Battery Storage
भारी निवेश के बावजूद 2030 के लक्ष्य के लिए ईवी सेक्टर में एकीकृत निवेश ढांचा ज़रूरी
सड़क पर इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ दिख रही हैं.तीन पहिया ईवी ने शहरों की लास्ट माइल डिलीवरी बदल दी है.प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें अब स्टेटस सिंबल भी हैं. लेकिन कागज़ पर रखे आंकड़े एक अलग कहानी कहते हैं. Institute for Energy Economics and Financial Analysis यानी IEEFA की 25 फरवरी 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार 2020 से…
अब सस्ती बैटरी उगाएंगी रात में भी सूरज
लंदन से आई एक ताज़ा रिपोर्ट ने वैश्विक ऊर्जा जगत में हलचल मचा दी है. Ember नाम के एक स्वतंत्र ऊर्जा थिंक-टैंक ने बताया कि अब बैटरी इतनी सस्ती हो चुकी है कि दिन में बनी सोलर बिजली को स्टोर करके रात में भी आसानी से दिया जा सकता है. यानी सोलर अब सिर्फ ‘डेलाइट’…
COP30 में ग्रिड और स्टोरेज पर दुनिया की सबसे बड़ी फंडिंग घोषणाएँ
रिन्यूबल एनर्जी की चर्चाओं में आमतौर पर बात सोलर की होती है, विंड की होती है, नेट जीरो की होती है. लेकिन इस बार COP 30 की चर्चाओं के बीच एक लाइन बार-बार सुनाई दी. “अगर ग्रिड नहीं बढ़ेगा, तो रिन्यूएबल के गीगावॉट भी काम नहीं आएंगे.” इसी चिंता को सामने रखते हुए जर्मनी और…
सोलर-स्टोरेज कॉम्बो से मिलेगी सस्ती बिजली, होगी 60 हज़ार करोड़ की बचत
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दौड़ में एक और बड़ी छलांग लगाई है। तय समय से पाँच साल पहले ही देश ने अपनी कुल बिजली क्षमता का 50% हिस्सा गैर-फॉसिल (यानी कोयला और गैस से हटकर) स्रोतों से हासिल कर लिया है। अब एक नई स्टडी बता रही है कि अगर आने वाले सालों में…
2032 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग के लिए भारत की कुल सौर-वायु क्षमता का सिर्फ 3% होगा काफी
भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रांति को साफ ऊर्जा से चार्ज करने के लिए भारी बिजली उत्पादन की नहीं, बल्कि बेहतर प्लानिंग और स्मार्ट पॉलिसी की ज़रूरत है। ऊर्जा थिंक टैंक ‘एम्बर’ की नई रिपोर्ट बताती है कि अगर सही नीतिगत बदलाव किए जाएं और चार्जिंग ढांचे को समय के अनुसार ढाला जाए, तो साल…
बैकअप से आगे की बात, BESS के साथ
जब सूरज ढल जाए, BESS साथ निभाए कुछ इंकलाब नारे लेकर आते हैं। और कुछ सिर झुकाए, काम में लगे रहते हैं—बिना तमगे की चाहत के, बस अपना फ़र्ज़ निभाते हुए। Battery Energy Storage Systems, यानी BESS, ऐसी ही एक चुपचाप चलने वाली ताक़त है। ना चर्चा, ना तमाशा, पर जिसकी गैरमौजूदगी में पूरी रिन्यूएबल…