क्या बदलते ऊर्जा बाज़ार के साथ कदम मिला पाएगा देश? भारत एक तरफ़ तेज़ी से रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ़ नई कोयला खदानों की तैयारी भी जारी है। यही विरोधाभास Global Energy Monitor (GEM) की नई रिपोर्ट “Still Digging 2026: Coal Mine Expansion Continues Despite Demand Plateau” सामने लाती है। रिपोर्ट कहती है…
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चीन की बाहर वैश्विक कोयला बिजली निर्माण पहुंचा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, COP28 से बढ़ी उम्मीदें
एक बेहद सकारात्मक घटनाक्रम में, संयुक्त राष्ट्र की 28वीं जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी28) के इस सप्ताह दुबई में शुरू होने से ठीक पहले, ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (जीईएम) के ताजा तिमाही आंकड़ों से पता चलता है कि चीन को छोड़कर, वैश्विक स्तर पर नए कोयला बिजली निर्माण में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। ग्लोबल कोल प्लांट ट्रैकर की नवीनतम जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2023 तक, इस…
कोयला बिजली: नए निवेशों की रफ्तार धीमी, पुराने प्लांटों को बंद करने पर स्थिति असपष्ट
ग्लोबल एनेर्जी मॉनिटर के नौवें वार्षिक सर्वे की मानें तो भविष्य में अपने कोयले के इस्तेमाल को लेकर भारत वैश्विक स्तर पर मिले जुले संकेत भेजता रहा है। कोल प्लांट पाइप लाइन पर होने वाले इस सर्वे के मुताबिक़ जहां एक ओर नयी कोयला बिजली परियोजनाओं की कमीशनिंग बीते वर्षों में अपने निचले स्तर पर रही है, वहीं नई परियोजनाओं के लिए प्लान भी बन रहे हैं और पुराने कम आउटपुट और एफ़िशियेन्सी वाले प्लांटों को बंद करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं दिख रही। रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत ने 2022 में केवल 3.5 गीगावाट (GW) नई कोयला बिजली क्षमता पर खर्च किया है। 2020 में होने वाली महामारी की मंदी को छोड़ दें तो, यह 2014 के उच्च…
साफ ऊर्जा अपनाने से सालाना 19.5 बिलियन डॉलर बचा सकता है भारत
भारत ने वर्ष 2025 तक 76 गीगावॉट यूटिलिटी स्केल सौर और पवन बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इससे भारत 19.5 बिलियन डॉलर (1588 बिलियन रुपए) बचा सकता है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर के ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है। ग्लोबल सोलर पावर ट्रैकर और ग्लोबल विंड पावर ट्रैकर के आंकड़ों के हिसाब से भारत को…
भारत में 184 बिलियन डॉलर के कार्बन सघन स्टील उत्पाद निवेश दांव पर
दुनिया में स्टील और लोहे के डीकार्बनाइजेशन सम्बन्धी प्रयासों पर नजर रखने वाली संस्था ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर ने अपनी नयी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि वैश्विक स्टील निर्माता इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) के मुकाबले ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ) आधारित क्षमता का अधिक निर्माण कर रहे हैं। यह तुलनात्मक रूप से अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के…
सौर हो या पवन, चीन नंबर वन
क्या आपको पता है दुनिया के किस देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की सबसे ज़्यादा क्षमता है? अच्छा क्या आपको पता है दुनिया के किस देश में पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता सबसे ज़्यादा है? चलिये एक इशारा देते हैं आपको। इन दोनों मामलों में हमारा एक पड़ोसी देश सबसे ऊपर पर बैठा है। अब तो इशारा आप समझ ही…
बीते सात साल थे पृथ्वी के इतिहास के सबसे गर्म साल
वैश्विक स्तर पर, पिछले सात वर्ष अब तक के सबसे गर्म सात साल के तौर पर हुए दर्ज, कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन के कंसंट्रेशन में बढ़त जारी यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने अपने सालाना निष्कर्ष जारी करते हुए बताया है कि वैश्विक स्तर पर वर्ष 2021 अब तक का सातवां सबसे…
बाइडेन की क्लाइमेट समिट तय करेगी दुनिया में जलवायु परिवर्तन की दशा और दिशा
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के प्रति अमेरिका एक बार फिर संजीदा है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने उन 40 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है जो कार्बन उत्सर्जन में सबसे ज्यादा योगदान करते हैं। इसके अलावा आमंत्रितों में कुछ ऐसे देश भी शामिल हैं जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों…
कोयला खादानों का मीथेन एमिशन जलवायु के लिए बड़ा ख़तरा
क्या आपको पता है दुनिया भर में प्रस्तावित कोयले की खादानों से होने वाला मीथेन एमिशन अमेरिका के सभी कोयला बिजली घरों से होने वाले कार्बन डाईऑक्साइड एमिशन की बराबरी कर सकता है? स्थिति की गंभीरता इसी से लगाइए कि CO2 के बाद ग्लोबल वार्मिंग में मीथेन का ही सबसे बड़ा योगदान रहा है। मीथेन…