दुनिया में जलवायु परिवर्तन पर बातचीत अब सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र के मंचों और COP सम्मेलनों तक सीमित नहीं रह गई है। अब इसकी झलक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौतों में भी दिखाई देने लगी है। यानी देश अब सिर्फ़ यह तय नहीं कर रहे कि किन वस्तुओं पर शुल्क कम होगा या व्यापार कैसे बढ़ेगा।…