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एनर्जी सिक्योरिटी के लिए समुंदर में उगाने होंगे पवन चक्कियों के जंगल

Posted on June 10, 2026

दुनिया लंबे समय तक तेल और गैस की पाइपलाइनों पर टिकी रही।

जहाँ ईंधन आता था, वहीं से ताकत आती थी।

जहाँ आपूर्ति रुकती थी, वहीं संकट शुरू हो जाता था।

लेकिन अब कई देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा समुद्र की तरफ देख रहे हैं।

जहाँ लहरों के बीच विशाल पवन चक्कियाँ खड़ी हो रही हैं।

Global Wind Energy Council यानी GWEC की नई रिपोर्ट कहती है कि दुनिया को भविष्य के ऊर्जा संकटों से बचाने के लिए offshore wind यानी समुद्र के भीतर लगने वाले पवन ऊर्जा संयंत्रों को तेज़ी से बढ़ाना होगा।

रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दुनिया ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति अस्थिरता से जूझ रही है।

GWEC का कहना है कि offshore wind अब सिर्फ जलवायु समाधान नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में 9.3 गीगावॉट नई offshore wind capacity बिजली ग्रिड से जोड़ी गई। यह इतनी बिजली पैदा कर सकती है कि लगभग एक करोड़ घरों को ऊर्जा मिल सके।

2025 offshore wind installations के लिहाज़ से इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा साल रहा। इसके साथ दुनिया में कुल offshore wind capacity बढ़कर 92.5 गीगावॉट पहुंच गई।

GWEC के मुताबिक यह क्षमता लगभग 10.2 करोड़ घरों को बिजली देने के बराबर है।

रिपोर्ट कहती है कि दुनिया offshore wind के 100 गीगावॉट के ऐतिहासिक स्तर के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

लेकिन असली कहानी आने वाले वर्षों की है।

GWEC का अनुमान है कि अगले दशक में दुनिया में 327 गीगावॉट नई offshore wind capacity जुड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो 2035 तक वैश्विक offshore wind capacity 420 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच यह क्षेत्र औसतन 24 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ सकता है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली ऊर्जा तकनीकों में शामिल हो जाएगा।

GWEC की Deputy CEO Rebecca Williams कहती हैं कि बड़े पैमाने पर विकसित किया जाए तो offshore wind एक रणनीतिक संपत्ति साबित हो सकता है। उनके मुताबिक यह साफ़ और सुरक्षित बिजली व्यवस्था के लिए सबसे भरोसेमंद नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में से एक है।

वे कहती हैं कि पिछले पाँच वर्षों में दुनिया ने आयातित ईंधनों पर निर्भरता से पैदा हुए दो बड़े संकट देखे हैं। ऐसे में देशों के सामने चुनौती यह है कि अगला संकट आने से पहले वे अपनी अर्थव्यवस्था को बिजली आधारित और घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित बना सकें।

Rebecca Williams के मुताबिक किसी देश के समुद्री तट पर offshore wind turbines की श्रृंखला खड़ी करना भविष्य के ऊर्जा झटकों से बचाव का एक तरीका बन सकता है।

रिपोर्ट बताती है कि चीन लगातार आठवें साल offshore wind installations में दुनिया में सबसे आगे रहा। 2025 में चीन ने अकेले 6.6 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ी और देश की कुल offshore wind capacity 48.4 गीगावॉट तक पहुंच गई।

आज दुनिया की कुल offshore wind capacity का 52 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन के पास है।

यूरोप में 2025 के दौरान ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने लगभग 2 गीगावॉट नई offshore wind capacity जोड़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक offshore wind अब 19 देशों की बिजली व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। इनमें चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, फ्रांस, वियतनाम और स्पेन जैसे देश शामिल हैं।

लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि offshore wind की रफ्तार अभी उतनी तेज़ नहीं है जितनी होनी चाहिए।

2025 में offshore wind auctions के ज़रिए खरीदी गई क्षमता सिर्फ 11.4 गीगावॉट रही, जो 2024 के रिकॉर्ड का केवल पाँचवाँ हिस्सा थी।

दुनिया भर में लगभग 25 गीगावॉट ऐसे offshore wind projects हैं जिन्हें “ready to build” माना गया है। यानी उन्हें मंज़ूरी मिल चुकी है, लेकिन वे अब भी वित्तीय फैसलों, ग्रिड कनेक्शन या सरकारी सहायता का इंतज़ार कर रहे हैं।

GWEC ने सरकारों के लिए आठ सूत्रीय कार्ययोजना भी जारी की है। इसमें offshore wind को राष्ट्रीय महत्व का बुनियादी ढांचा घोषित करने, अनुमति प्रक्रियाओं को तेज़ करने, वित्त बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और गलत सूचनाओं के खिलाफ सार्वजनिक भरोसा बनाने जैसे सुझाव शामिल हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई देशों में परियोजनाएँ सिर्फ तकनीकी वजहों से नहीं रुक रहीं।

धीमी अनुमति प्रक्रियाएँ, ग्रिड bottlenecks, सप्लाई चेन की सीमाएँ और निवेश संबंधी अनिश्चितताएँ भी बड़ी बाधाएँ हैं।

कई सालों तक ऊर्जा सुरक्षा का मतलब तेल भंडार और गैस पाइपलाइन माना जाता था।

अब यह परिभाषा बदलती दिख रही है।

अब शायद ऊर्जा सुरक्षा का मतलब होगा,

समंदर के बीच खड़ी वे पवन चक्कियाँ,

जो हवा से बिजली बनाती हैं,

और किसी दूसरे देश की पाइपलाइन पर निर्भर नहीं होतीं।

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