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Category: विचार

हरा है रंग, बेरंग है हकीकत: खनन की असली कीमत चुका रही हैं अफ्रीकी महिलाएं

Posted on May 1, 2026

हरारे, जिम्बाब्वे: दुनिया तेजी से “ग्रीन एनर्जी” की तरफ बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल, बैटरी स्टोरेज। इन सबके पीछे एक नई दौड़ चल रही है, खनिजों की दौड़। लिथियम, कोबाल्ट, निकल। लेकिन इस दौड़ की एक और कहानी है, जो अक्सर रिपोर्ट्स के हाशिये पर रह जाती है। अफ्रीका के खनिज-समृद्ध इलाकों में…

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मटके की ठंडक, मिट्टी की सीख

Posted on June 12, 2025

– श्रद्धा श्रीवास्तव मालवा की तीव्र गर्मी और झुलसाने वाली धूप हर भोपाली के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। ऐसी गर्मी, जिसमें सूरज मानो आग बरसाता है और लू अच्छे-अच्छों को बीमार कर देती है। इन विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए आजकल एसी, फ्रिज और कूलर जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग आम हो…

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बजट 2025: एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त को मजबूत करने की दिशा में कदम

Posted on February 24, 2025

नमिता विकास, संस्थापक और प्रबंध निदेशक, ऑक्टस ईएसजीस्वप्ना पाटिल, प्रबंधक, इंडिया, एसएमई क्लाइमेट हब एमएसएमई: अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जलवायु परिवर्तन की चुनौती छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होते हैं। भारत में इनका योगदान जीडीपी का 30% है। 2025-26 के केंद्रीय बजट में एमएसएमई को बढ़ावा…

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शहर, जलवायु परिवर्तन और डॉ. अंजल प्रकाश का नज़रिया 

Posted on January 29, 2025

Climate कहानी “आपने कभी सोचा है, शहर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों का नाम नहीं हैं। ये ज़िंदगियों के सपनों का कैनवास हैं। लेकिन ये सपने, जिनमें हम और आप जीते हैं, आज जलवायु परिवर्तन के साये में हैं। और एशिया के शहर तो इस बदलाव के केंद्र में खड़े हैं।” ये…

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बाकू में COP29: जलवायु संकट और अधूरे वादों की कहानी

Posted on November 25, 2024

निशान्त बाकू, अज़रबैजान में आयोजित 29वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP29) ने दुनिया भर के देशों को एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होने का मौका दिया. लेकिन, इस सम्मेलन के अंत में जो हासिल हुआ, उसने यह साबित किया कि वादों और वास्तविकता के बीच की खाई आज भी बहुत गहरी है. सम्मेलन में कुछ महत्वपूर्ण…

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कार्बन सीमा समायोजन तंत्र हो और व्‍यावहारिक: विशेषज्ञ

Posted on September 20, 2024

यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) वैश्विक व्यापार को नया आकार दे रहा है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं, खास तौर से विकासशील देशों के लिए नई जटिलताएँ भी पेश कर रहा है। अन्य जी7 देशों द्वारा इसी तरह के उपायों पर विचार किए जाने के साथ हम इस बारे में कई…

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जलवायु कार्यवाही में ग्‍लोबल साउथ की भूमिका बेहद महत्‍वपूर्ण

Posted on March 29, 2024

दुनिया में चल रहे भू-राजनी‍तिक संघर्षों को देखते हुए जलवायु परिवर्तन पर ध्‍यान केन्द्रित रखना बेहद महत्‍वपूर्ण है। इस काम में ग्‍लोबल साउथ की भूमिका बहुत अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल भारत में जी20 के बाद अगली जी21 की अध्यक्षता भी ग्‍लोबल साउथ के पास ही है। ऐसे में वह एजेंडा…

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जलवायु परिवर्तन से भारत की संवेदनशीलता और अर्थव्यवस्था पर पड़ता प्रभाव

Posted on February 28, 2024

भारत की विविध भौगोलिक संरचना, जलवायु परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक कारकों के कारण जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों के प्रति उसकी संवेदनशीलता अधिक है। ये प्रभाव पहले से ही अर्थव्यवस्था और आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं, जो विकास और गरीबी उन्मूलन में प्रगति को बाधित कर सकते हैं।उदाहरण के लिए, वर्ष 2021 में, भारत में…

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कहीं आप किसी बच्चे की बौद्धिक मंदता के लिए ज़िम्मेदार तो नहीं?

Posted on February 27, 2024

दीपमाला पाण्डेय हर बार, बाज़ार जाने से पहले जब आप वो कपड़े का थैला ले जाना भूल जाते हैं और फिर सामान खरीदने के बाद दुकानदार से पॉलिथीन की थैली मांगते हैं, तब आप अनजाने में ही सही, लेकिन कहीं न कहीं, किसी बच्चे की बौद्धिक दिव्यांगता में योगदान दे रहे होते हैं। जी हाँ,…

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जलवायु परिवर्तन के शोर से सन्नाटे तक

Posted on February 10, 2024

दीपमाला पाण्डेय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भारत में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनुमेय शोर स्तर निर्धारित किया हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियमों ने दिन और रात, दोनों समय के लिए, विभिन्न क्षेत्रों में शोर के स्वीकार्य स्तर को परिभाषित भी किया है। जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में, अनुमेय सीमा दिन के लिए 75 डीबी…

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क्लाइमेट की कहानी, मेरी ज़बानी

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