मृणमय चटराज नेपाल को जलवायु न्याय चाहिए। बिल्कुल चाहिए।जिस देश का वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में हिस्सा करीब 0.1 फीसदी है, अगर वही बदलती जलवायु की भारी कीमत चुका रहा है, तो दुनिया के बड़े प्रदूषक देशों से सवाल पूछना उसका हक है।लेकिन नेपाल की हालिया तबाही के बाद एक दूसरा सवाल भी पूछना पड़ेगा।…
Category: विचार
नेपाल की तबाही ने दिखाया, बदलते हिमालय में आपदा का चेहरा भी बदल रहा है
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर शुरुआती तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। यह कोई सामान्य मानसूनी बाढ़ नहीं थी और न ही पारंपरिक अर्थों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियल झील के अचानक फटने से आई बाढ़। वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, करीब 5,200 से 5,400 मीटर…
हरा है रंग, बेरंग है हकीकत: खनन की असली कीमत चुका रही हैं अफ्रीकी महिलाएं
हरारे, जिम्बाब्वे: दुनिया तेजी से “ग्रीन एनर्जी” की तरफ बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल, बैटरी स्टोरेज। इन सबके पीछे एक नई दौड़ चल रही है, खनिजों की दौड़। लिथियम, कोबाल्ट, निकल। लेकिन इस दौड़ की एक और कहानी है, जो अक्सर रिपोर्ट्स के हाशिये पर रह जाती है। अफ्रीका के खनिज-समृद्ध इलाकों में…
मटके की ठंडक, मिट्टी की सीख
– श्रद्धा श्रीवास्तव मालवा की तीव्र गर्मी और झुलसाने वाली धूप हर भोपाली के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। ऐसी गर्मी, जिसमें सूरज मानो आग बरसाता है और लू अच्छे-अच्छों को बीमार कर देती है। इन विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए आजकल एसी, फ्रिज और कूलर जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग आम हो…
बजट 2025: एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त को मजबूत करने की दिशा में कदम
नमिता विकास, संस्थापक और प्रबंध निदेशक, ऑक्टस ईएसजीस्वप्ना पाटिल, प्रबंधक, इंडिया, एसएमई क्लाइमेट हब एमएसएमई: अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जलवायु परिवर्तन की चुनौती छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होते हैं। भारत में इनका योगदान जीडीपी का 30% है। 2025-26 के केंद्रीय बजट में एमएसएमई को बढ़ावा…
शहर, जलवायु परिवर्तन और डॉ. अंजल प्रकाश का नज़रिया
Climate कहानी “आपने कभी सोचा है, शहर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों का नाम नहीं हैं। ये ज़िंदगियों के सपनों का कैनवास हैं। लेकिन ये सपने, जिनमें हम और आप जीते हैं, आज जलवायु परिवर्तन के साये में हैं। और एशिया के शहर तो इस बदलाव के केंद्र में खड़े हैं।” ये…
बाकू में COP29: जलवायु संकट और अधूरे वादों की कहानी
निशान्त बाकू, अज़रबैजान में आयोजित 29वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP29) ने दुनिया भर के देशों को एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होने का मौका दिया. लेकिन, इस सम्मेलन के अंत में जो हासिल हुआ, उसने यह साबित किया कि वादों और वास्तविकता के बीच की खाई आज भी बहुत गहरी है. सम्मेलन में कुछ महत्वपूर्ण…
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र हो और व्यावहारिक: विशेषज्ञ
यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) वैश्विक व्यापार को नया आकार दे रहा है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं, खास तौर से विकासशील देशों के लिए नई जटिलताएँ भी पेश कर रहा है। अन्य जी7 देशों द्वारा इसी तरह के उपायों पर विचार किए जाने के साथ हम इस बारे में कई…
जलवायु कार्यवाही में ग्लोबल साउथ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों को देखते हुए जलवायु परिवर्तन पर ध्यान केन्द्रित रखना बेहद महत्वपूर्ण है। इस काम में ग्लोबल साउथ की भूमिका बहुत अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल भारत में जी20 के बाद अगली जी21 की अध्यक्षता भी ग्लोबल साउथ के पास ही है। ऐसे में वह एजेंडा…
जलवायु परिवर्तन से भारत की संवेदनशीलता और अर्थव्यवस्था पर पड़ता प्रभाव
भारत की विविध भौगोलिक संरचना, जलवायु परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक कारकों के कारण जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों के प्रति उसकी संवेदनशीलता अधिक है। ये प्रभाव पहले से ही अर्थव्यवस्था और आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं, जो विकास और गरीबी उन्मूलन में प्रगति को बाधित कर सकते हैं।उदाहरण के लिए, वर्ष 2021 में, भारत में…