हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी आमदनी और भोजन के लिये वन्यजीव प्रजातियों पर है निर्भर। इंसान के भोजन के लिये 10 हजार वन्यजीव प्रजातियों का होता है दोहनअक्सर ‘जैव-विविधता के लिये आईपीसीसी’ के तौर पर वर्णित की जाने वाली अंतर्राष्ट्रीय शोध एवं नीति इकाई आईपीबीईएस ने एक नयी रिपोर्ट जारी की है, जो कहती है- विकसित और विकासशील…
Category: विचार
एनसीईआरटी द्वारा पर्यावरण पाठ्यक्रम में बदलाव कितना सही?
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि दुनिया भर में करीब 100 करोड़ बच्चों पर जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के बढ़ते प्रभावों का खतरा है। इस आंकड़ें में भारत का भी योगदान है और भारत समेत 33 देशों के बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा पर यह जलवायु संकट मंडरा…
आगामी COP की कर रहा है ज़मीन तैयार बॉन का जलवायु सम्मेलन
फिलहाल जब आप और हम भारत में भीषण गर्मी से त्रस्त हैं, जर्मनी के बॉन शहर में दुनिया भर के तमाम देश देश एक बेहतर कल के लिए अपनी जलवायु प्रतिक्रिया पर चर्चा और सुधार करने के लिए एक साथ आए हैं। दरअसल, ग्लासगो में COP26 के सात महीने बाद, दुनिया भर के देशों ने…
वातावरण से कार्बन कैसे हटायेंगे, IPCC रिपोर्ट में वैज्ञानिक बताएँगे
IPCC ने अब तक बढ़ते तापमान के कारणों, चुनौतियों और प्रभावों का विवरण देने वाली रिपोर्ट के दो सेट जारी किए हैंजहाँ एक ओर जलवायु परिवर्तन लगातार अपनी गति पर बढ़ रहा है और स्थिति बिगाड़ रहा है, वहीँ एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र का अंतर सरकारी पैनल (IPCC) जलवायु परिवर्तन पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट…
जलवायु परिवर्तन की वित्तीय मार के लिए नहीं हैं भारतीय बैंक तैयार
संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित नेट-ज़ीरो बैंकिंग एलायंस में 40 देशों के बैंकों को किया गया सदस्य के रूप में सूचीबद्ध, मगर सूची में नहीं है एक भी भारतीय बैंक जलवायु परिवर्तन का हमारे ऊपर व्यापक असर होता है। और यह नकारात्मक असर सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी होता है। भारत जैसे विकासशील…
जलवायु अनुकूलन के लिए वित्त हो व्यवस्थित
जब हम जलवायु परिवर्तन और उसकी वजह से होने वाले जोखिम की बात करते हैं तो यह बात सामने आती है कि फाइनेंस को अधिक महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर सामने रखा जाए। जलवायु परिवर्तन की विकराल होती समस्या से निपटने के लिये अनुकूलन कार्य में जलवायु वित्त या क्लाइमेट फाइनेंसिंग की भूमिका निर्विवाद रूप…
विशेषज्ञों की राय, रूपांतरणकारी दृष्टिकोण अपनाकर ठोस और तात्कालिक कदम उठाये जाएं
जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट भविष्य की एक भयावह तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कार्बन उत्सर्जन मौजूदा रफ्तार से बढ़ता रहा तो वर्ष 2100 तक लगभग पूरे भारत में वेट बल्ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस के जानलेवा स्तर तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है…
इस बार भी चुनावी विमर्श से गायब है प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का मुद्दा
पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के गंभीर परिणामों का सामना कर रही है, मगर भारत में यह मसला अब भी चुनावी मुद्दा नहीं बनता। आबादी के लिहाज से भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इसी महीने से विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि ज्यादातर राजनीतिक दलों ने अभी अपना चुनाव घोषणापत्र जारी नहीं…
बजट 2022: अंततः जलवायु परिवर्तन पर सरकार की स्पॉटलाइट
निशान्त यह संभवत: पहला केंद्रीय बजट था जिसमें अपने शुरुआती वक्तव्य में किसी वित्त मंत्री ने जलवायु कार्रवाई की प्रासंगिकता को स्वीकार किया और ठोस कदम लेने ले लिए घोषणाएं भी की।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी लड़ाई में गैर-नवीकरणीय ऊर्जा…
COP26 की कसौटी पर भारत की राह चुनौतीपूर्ण : विशेषज्ञ
कोयले के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिये भारत में एक मजबूत नीति और नियामक तंत्र बहुत जरूरी ग्लासगो में हाल में सम्पन्न सीओपी26 में निर्धारित लक्ष्य और व्यक्त संकल्पबद्धताओं की पूर्ति की कसौटी पर भारत अलग तरह की चुनौतियों को सामना कर रहा है। कोयले के चलन को चरणबद्ध ढंग से खत्म करने की…