संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब जलवायु संकट की कीमत अब केवल तापमान, उत्सर्जन या मौसम के आंकड़ों में नहीं दिखाई देती। नेपाल में पिछले महीने हुई विनाशकारी ग्लेशियर आपदा ने इस बहस को सीधे उन लोगों की जिंदगी और नुकसान से जोड़ दिया है, जो जलवायु संकट…
चलिए पढ़ा जाये
नेपाल की भयावह हिमालयी आपदा के पीछे जलवायु परिवर्तन की कितनी भूमिका? वैज्ञानिक विश्लेषण ने खोली पहाड़ की बदलती कहानी
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास लांगटांग लिरुंग पर्वत से बर्फ और चट्टान का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आया। इसके बाद पानी, बर्फ और मलबे की एक विनाशकारी धारा ने नीचे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई और 5,000 से ज्यादा…
समुद्र 100 दिन तक रिकॉर्ड गर्म रहा तो कौन चुकाएगा कीमत ?
अगर किसी शहर में लगातार 100 दिनों तक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बना रहे, तो हम इसे बड़ी खबर मानेंगे। लेकिन यही बात जब महासागर के साथ होती है, तो उसका असर हमारी नजर से काफी हद तक बाहर रहता है। 2026 में दुनिया के महासागर कुछ ऐसी ही असाधारण गर्मी से गुजर रहे हैं।…
पांच दशक बाद बदली कोयले की चाल : IEA
बिजली के लिए घटी मांग, उत्पादन और आयात की बदली तस्वीर भारत का कोयला बाजार अभी एक अजीब मोड़ पर खड़ा है। मांग बढ़ रही है, उत्पादन का रिकॉर्ड बन रहा है, और साथ ही आयात लगातार घट रहा है। आईईए की कोल मिड-ईयर अपडेट 2026 रिपोर्ट में यह पूरी कहानी विस्तार से सामने आई…
BRICS में जलवायु अब पर्यावरण का नहीं, अर्थव्यवस्था का सवाल है
जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बातचीत में एक सवाल अक्सर सबसे आगे रहता है। एमिशन कितना कम होगा? लेकिन नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। यहां सवाल सिर्फ एमिशन घटाने का नहीं है। सवाल यह भी है कि अगर जलवायु आपदाएं बढ़ती हैं तो सड़कों,…
जलवायु और साफ हवा पर एक डॉलर का निवेश दे सकता है 15 डॉलर का फायदा
जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को अक्सर दो अलग-अलग समस्याओं की तरह देखा जाता है। एक का संबंध तापमान बढ़ने से जोड़ा जाता है और दूसरे का सांस की बीमारियों से। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट कहती है कि दोनों को साथ लेकर काम करने से देशों को पर्यावरणीय फायदे के साथ बड़ा आर्थिक…
नेपाल को जलवायु न्याय चाहिए, लेकिन अपने फैसलों का हिसाब भी
मृणमय चटराज नेपाल को जलवायु न्याय चाहिए। बिल्कुल चाहिए।जिस देश का वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में हिस्सा करीब 0.1 फीसदी है, अगर वही बदलती जलवायु की भारी कीमत चुका रहा है, तो दुनिया के बड़े प्रदूषक देशों से सवाल पूछना उसका हक है।लेकिन नेपाल की हालिया तबाही के बाद एक दूसरा सवाल भी पूछना पड़ेगा।…
नेपाल की बाढ़ ने दुनिया से एक सवाल पूछा है
किसी प्राकृतिक आपदा को देखते ही उसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ देना विज्ञान नहीं है। नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी के इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ के मामले में भी अभी ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है, जो इस खास घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन के कारण हुई आपदा कह सके। लेकिन क्या…
नेपाल की तबाही ने दिखाया, बदलते हिमालय में आपदा का चेहरा भी बदल रहा है
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर शुरुआती तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। यह कोई सामान्य मानसूनी बाढ़ नहीं थी और न ही पारंपरिक अर्थों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियल झील के अचानक फटने से आई बाढ़। वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, करीब 5,200 से 5,400 मीटर…
होर्मुज संकट ने छह महीने में बढ़ाया 330 अरब डॉलर से ज्यादा फॉसिल फ्यूल का बिल, भारत पर 22.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ
होर्मुज संकट शुरू होने के छह महीने में दुनिया के फॉसिल फ्यूल आयात करने वाले देशों पर 330 अरब डॉलर से ज्यादा का अतिरिक्त खर्च पड़ा है। यानी मार्च से अगस्त 2026 के बीच देशों को हर महीने औसतन करीब 55 अरब डॉलर ज्यादा चुकाने पड़े। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की…