उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री तक पहुंच चुका है। दोपहर की सड़कें खाली हैं। हवा चलती भी है तो जैसे किसी ने हेयर ड्रायर चेहरे पर चला दिया हो। मगर इस बार कहानी सिर्फ दिन की गर्मी की नहीं है। असली डर रात में छुपा है। रात, जो कभी राहत हुआ करती…
चलिए पढ़ा जाये
कोयले के प्लांट बढ़े, मगर दुनिया ने कम जलाया कोयला
दुनिया अजीब मोड़ पर खड़ी है।एक तरफ नए कोयला बिजलीघर अब भी बन रहे हैं। दूसरी तरफ उन्हीं देशों में कोयले से बनने वाली बिजली घट रही है। यानी प्लांट बढ़ रहे हैं, लेकिन कोयला पहले जितना जल नहीं रहा। यही तस्वीर सामने आई है Global Energy Monitor की नई रिपोर्ट Boom and Bust 2026 में।…
हर नए घर के साथ बढ़ रहा कार्बन संकट
दुनिया इस समय दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ घरों की भारी कमी। दूसरी तरफ महंगी होती बिजली और ईंधन। ऐसे समय में एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने साफ कहा है कि अगर इमारतों और घरों को जलवायु के हिसाब से नहीं बदला गया, तो आने वाले सालों में रहने की लागत और बढ़ेगी,…
क्या कोयले पर निर्भरता देश को एक लाख करोड़ डॉलर के जाल में फंसा सकती है?
भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग विस्तारों में से एक के बीच खड़ा है। नई फैक्ट्रियां बन रही हैं। रेलवे नेटवर्क फैल रहा है। शहर ऊंचे हो रहे हैं। और इस पूरी कहानी की रीढ़ है, स्टील। लेकिन इसी स्टील के भीतर एक ऐसा सवाल छिपा है, जो आने वाले दशकों…
इस मच्छर फैक्ट्री में बन रहे हैं डेंगू मलेरिया मारने वाले मच्छर
दुनिया का शायद सबसे अजीब सवाल इस वक्त कोलंबिया के शहर मेडेलीन में पूछा जा रहा है। “क्या इंसानों को बचाने के लिए करोड़ों मच्छर पैदा किए जा सकते हैं?” सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है। लेकिन यही सच है। दक्षिण अमेरिकी देश Medellín में एक ऐसी “मच्छर फैक्ट्री” चल रही है,…
हॉर्मूज़ से मिली सीख, ऊर्जा का भविष्य स्थानीय और स्वच्छ ही ठीक
समुद्र कभी सिर्फ पानी नहीं होता।उसके भीतर व्यापार चलता है, राजनीति चलती है, देशों की सांस चलती है।और जब वही समुद्र अचानक बंद हो जाए, तो असर सिर्फ बंदरगाहों पर नहीं पड़ता।रसोई तक पहुंचता है। खेत तक पहुंचता है। बिजली के बिल तक पहुंचता है। इस बार दुनिया ने यही देखा है। मध्य पूर्व में…
कटते जंगल, टूटती बारिश, और अमेज़न का डरावना मोड़
अमेज़न के जंगल को अक्सर “धरती के फेफड़े” कहा जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि ये फेफड़े सिर्फ कमजोर नहीं हो रहे, बल्कि एक ऐसे मोड़ के करीब पहुंच रहे हैं जहां से वापसी मुश्किल हो सकती है। जर्नल Nature में प्रकाशित एक नई स्टडी “Deforestation-induced drying lowers Amazon climate threshold” के…
रिसाव जो दिखता नहीं, असर जो रुकता नहीं: मीथेन की कहानी
दुनिया इस वक्त ऊर्जा संकट और क्लाइमेट संकट, दोनों के बीच खड़ी है। एक तरफ गैस की कमी की चिंता है, दूसरी तरफ वही गैस हवा में बेवजह उड़ रही है। यह विरोधाभास अब और साफ दिखने लगा है। International Energy Agency की नई रिपोर्ट Global Methane Tracker 2026 इसी कहानी को सामने लाती है।…
हरा है रंग, बेरंग है हकीकत: खनन की असली कीमत चुका रही हैं अफ्रीकी महिलाएं
हरारे, जिम्बाब्वे: दुनिया तेजी से “ग्रीन एनर्जी” की तरफ बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल, बैटरी स्टोरेज। इन सबके पीछे एक नई दौड़ चल रही है, खनिजों की दौड़। लिथियम, कोबाल्ट, निकल। लेकिन इस दौड़ की एक और कहानी है, जो अक्सर रिपोर्ट्स के हाशिये पर रह जाती है। अफ्रीका के खनिज-समृद्ध इलाकों में…
बीमारी की भाषा में क्लाइमेट की बात, दोगुना असर
जलवायु परिवर्तन को समझाने के कई तरीके हैं। तापमान, कार्बन, ग्लेशियर, समुद्र। लेकिन एक नई स्टडी कहती है कि अगर आप क्लाइमेट को “सेहत” की भाषा में समझाते हैं, तो लोग सिर्फ समझते नहीं, प्रतिक्रिया भी देते हैं। Wellcome Trust के लिए Climate Opinion Research Exchange द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया…