फुटबॉल का खेल सिर्फ पैरों से नहीं खेला जाता। उसमें फेफड़े लगते हैं, सांस लगती है, शरीर की रफ्तार लगती है। 90 मिनट तक लगातार दौड़ते खिलाड़ी सिर्फ गेंद के पीछे नहीं भाग रहे होते, वे अपने शरीर की सीमा को भी धक्का दे रहे होते हैं। लेकिन अब दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल एक…
Category: जलवायु परिवर्तन
बदलती सर्दियां, सिकुड़ते दाने, भारत के गेहूं पर बढ़ता जलवायु संकट
दिल्ली की मंडियों तक पहुंचने वाली गेहूं की हर बोरी सिर्फ अनाज नहीं होती। उसमें एक मौसम छिपा होता है। ठंडी रातें, धुंध वाली सुबहें, जनवरी की ठिठुरन, और फरवरी की हल्की धूप। गेहूं सिर्फ खेत में नहीं उगता, वह मौसम की लय पर उगता है। लेकिन अब यही लय टूट रही है। Climate Trends…
अब तो रातें भी नहीं ठंडी, क्यों हो गई है भारत की गर्मी और खतरनाक
उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री तक पहुंच चुका है। दोपहर की सड़कें खाली हैं। हवा चलती भी है तो जैसे किसी ने हेयर ड्रायर चेहरे पर चला दिया हो। मगर इस बार कहानी सिर्फ दिन की गर्मी की नहीं है। असली डर रात में छुपा है। रात, जो कभी राहत हुआ करती…
कटते जंगल, टूटती बारिश, और अमेज़न का डरावना मोड़
अमेज़न के जंगल को अक्सर “धरती के फेफड़े” कहा जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि ये फेफड़े सिर्फ कमजोर नहीं हो रहे, बल्कि एक ऐसे मोड़ के करीब पहुंच रहे हैं जहां से वापसी मुश्किल हो सकती है। जर्नल Nature में प्रकाशित एक नई स्टडी “Deforestation-induced drying lowers Amazon climate threshold” के…
बीमारी की भाषा में क्लाइमेट की बात, दोगुना असर
जलवायु परिवर्तन को समझाने के कई तरीके हैं। तापमान, कार्बन, ग्लेशियर, समुद्र। लेकिन एक नई स्टडी कहती है कि अगर आप क्लाइमेट को “सेहत” की भाषा में समझाते हैं, तो लोग सिर्फ समझते नहीं, प्रतिक्रिया भी देते हैं। Wellcome Trust के लिए Climate Opinion Research Exchange द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया…
दुनिया ये 100 सबसे गर्म शहरों में 97 भारत से
अप्रैल की दोपहर है। सड़क पर हवा चल रही है, लेकिन ठंडक नहीं, जैसे किसी ने गर्म हवा को ही पंखे पर चढ़ा दिया हो। इसी बीच एक आंकड़ा आता है, जो इस गर्मी को सिर्फ एहसास नहीं, एक सच्चाई बना देता है। 28 अप्रैल 2026 को AQI.in के रियल टाइम डेटा के मुताबिक, दुनिया…
बढ़ता जाएगा जानवरों के घर पर मौसम के वार
जंगल हमेशा से बदलते रहे हैं। मौसम भी। लेकिन अब जो बदल रहा है, वह रफ्तार है, और पैटर्न है। अब खतरा धीरे-धीरे बढ़ती गर्मी का नहीं, बल्कि एक के बाद एक आने वाले झटकों का है। जर्नल Nature Ecology & Evolution में प्रकाशित एक नई स्टडी इसी बदलती तस्वीर को सामने लाती है। जर्मनी…
सोलर की जीत पक्की, फंडिंग की जंग बाकी
शाम ढल चुकी है। शहर रोशनी से भर गया है। कहीं सोलर से आई बिजली है, कहीं अब भी कोयले से। लेकिन इस रोशनी के पीछे एक और कहानी चल रही है, जो अक्सर दिखाई नहीं देती। यह कहानी है पैसे की। Institute for Energy Economics and Financial Analysis की एक नई रिपोर्ट इस छिपी…
धूप में लोकतंत्र, पसीने में फैसला
चेन्नई के एक बूथ पर सुबह के नौ बजे हैं। बूथ अधिकारी की कमीज़ पीठ से चिपकी हुई है। बाहर कतार में खड़े लोग छाया ढूंढ रहे हैं, जहां छाया है ही नहीं। हवा में नमी इतनी है कि पसीना सूखता नहीं, बस शरीर पर ठहर जाता है। यह सिर्फ गर्मी नहीं है। यह वही…
हॉर्मुज़ की हलचल से खेतों तक पहुंचा संकट. उर्वरक निर्भरता पर बड़ा सवाल
रातों-रात कुछ नहीं बदलता। लेकिन दुनिया की सबसे अहम समुद्री गलियों में अगर हलचल बढ़ जाए, तो उसका असर चुपचाप खेतों तक पहुंच जाता है। इसी कड़ी में एक नई रिपोर्ट ने भारत के उर्वरक सिस्टम की एक गहरी कमजोरी की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट कहती है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर…