आज प्रकाशित एक ताज़ा शोध से पता चलता है कि फेसबुक पर फॉसिल फ्युएल से जुड़े विज्ञापनों को ऐसे दिखाया जाता है जिससे उनके जलवायु समर्थन में होने की छवि बनती है और एक भ्रम की स्थिति सी बन जाती है जिसका फायदा सीधे तौर पर यह फॉसिल फ्युएल कम्पनियां उठाती हैं। इन्फ्लुएंसमैप की “क्लाइमेट…
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साफ़ हवा अब एक लग्ज़री, दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण ने लिया विकराल रूप
दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण का संकट विकासशील देशों के लिए खास तौर से बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। बहु क्षेत्रीय प्रदूषणकारी स्रोतों की व्यापक श्रंखला और उससे जुड़े मसलों की व्यापकता को देखते हुए इनके क्षेत्रीय स्तर पर समुचित समाधान निकालने की जरूरत है। मगर यह एक बहुत बड़ा काम है वायु प्रदूषण को नियंत्रित…
हर डिग्री सेल्सियस वार्मिंग में बढ़त के साथ मानसून वर्षा में लगभग 5% वृद्धि की संभावना
अब समय है स्वीकारने का कि जलवायु परिवर्तन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी पर दिखा रहा है असर, ग्लोबल वार्मिंग भारत में मानसून की बारिश को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा रहा है भारत के पश्चिमी तटीय राज्यों महाराष्ट्र और गोवा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में चरम मौसम की घटनाओं का एक…
गंभीर चक्रवातों की आवृति में हुई 150% की बढ़त
बीते समय के मुकाबले अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता में खतरनाक वृद्धि हुई है। इतनी ख़तरनाक, कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि ‘वेरी सीवियर’ या बेहद गंभीर चक्रवातों की आवृति में 150% की बढ़त दर्ज की गयी है। यह दावा है पुणे के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटिओरॉलॉजी (भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान)…
जलवायु,कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकट को दूर करने की G7 देशों की तैयारी काफ़ी नहीं
तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए G7 नेताओं ने जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकटों से निपटने का एक ऐतिहासिक अवसर को खो दिया है, यह मानना है प्रमुख विश्लेषकों का कॉर्नवाल शिखर सम्मेलन के समापन के बाद। उनका कहना है कि यदि ये नेतागण अक्टूबर में होने वाली G20 बैठक तक एकजुट नहीं होते हैं, तो COP26 बैठक का…
स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ेगी जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी मार, रहना होगा तैयार: विशेषज्ञ
जलवायु परिवर्तन और सेहत पर पड़ने वाले उसके प्रभावों के विषय पर विभिन्न विचार-विमर्शों के लिये स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने के उद्देश्य से बनाया गया अपनी तरह का पहला दस्तावेज हेल्दी एनर्जी इनीशिएटिव इंडिया ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य संगठनों के सहयोग से अपनी तरह का पहला मार्गदर्शक दस्तावेज जारी किया है। ‘नो वैक्सीन फॉर क्लाइमेट…
पिघलते ग्लेशियर और जलवायु परिवर्तन की मार, कर रही है तीसरे पोल पर वार
हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रंखलाओं में जलवायु परिवर्तन के फुटप्रिंट बिल्कुल खुलकर ज़ाहिर हो गये हैं। इस क्षेत्र को तीसरा पोल भी कहा जाता है और यहां ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नुकसानदेह परिघटनाएं हो रही हैं, बर्फबारी की तर्ज में बदलाव हो रहे हैं। ये उन देशों के लिये बुरी खबर है जो पानी की…
ग़रीब देशों को मिल रही फंडिंग में रिन्युब्ल नहीं, गैस को मिल रही तरजीह
जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद, सार्वजनिक संस्थान प्राकृतिक गैस के लिए, पवन या सौर के मुक़ाबले, चार गुना ज़्यादा फंड प्रदान करते हैं बात जब ऊर्जा क्षेत्र के लिए फंडिंग की हो तब तमाम अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पवन या सौर की तुलना में गैस परियोजनाओं के लिए चार गुना…
तूफानों ने की मानसून की रफ्तार कम, जलवायु परिवर्तन का असर साफ़
जलवायु परिवर्तन का मौसम की बदलती तर्ज से गहरा नाता है और यह ताकतवर चक्रवाती तूफानों तथा बारिश के परिवर्तित होते कालचक्र से साफ जाहिर भी होता है। हमने हाल ही में एक के बाद एक दो शक्तिशाली तूफानों ताउते और यास को भारत के तटीय इलाकों में तबाही मचाते देखा है। इनमें से एक…
G7 देशों की जलवायु वित्त प्रतिज्ञाओं के मामले में वादाखिलाफ़ी बादस्तूरजारी
आज जारी एक ताज़ा विश्लेष्ण से पता चला है कि अमीर देशों की मौजूदा क्लाइमेट फाइनेंस योजनाएं अभी भी न सिर्फ 100 बिलियन डॉलर के लक्ष्य से कम हैं, बल्कि इनमें भविष्य के फंड के लिए वितरण और समयरेखा के बारे में विवरण और स्पष्टता की गंभीर कमी है। CARE संस्था ने पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों…