दुनिया में जलवायु परिवर्तन पर बातचीत अब सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र के मंचों और COP सम्मेलनों तक सीमित नहीं रह गई है। अब इसकी झलक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौतों में भी दिखाई देने लगी है। यानी देश अब सिर्फ़ यह तय नहीं कर रहे कि किन वस्तुओं पर शुल्क कम होगा या व्यापार कैसे बढ़ेगा।…
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ग्रीन स्टील नहीं होगी महंगी, अगर स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन बढ़ें साथ-साथ: नई रिपोर्ट
स्टील बनाना दुनिया के सबसे प्रदूषणकारी औद्योगिक कामों में से एक है। भारत जैसे देश के लिए चुनौती और भी बड़ी है। एक तरफ़ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को स्टील चाहिए, दूसरी तरफ़ कार्बन उत्सर्जन भी घटाना है। लेकिन क्या ग्रीन स्टील बनाना बहुत महंगा पड़ेगा? TransitionZero की नई रिपोर्ट कहती है, शायद नहीं। अगर…
दुनिया में फिर बढ़ रही है भूख, जलवायु संकट और महंगाई ने करोड़ों लोगों की थाली से छीना पौष्टिक भोजन
भूख सिर्फ़ तब नहीं होती जब थाली खाली हो। कई बार थाली भरी होती है, लेकिन उसमें वह खाना नहीं होता जिसकी शरीर को ज़रूरत है।यही वजह है कि दुनिया में खाद्य सुरक्षा की तस्वीर अब पहले से कहीं ज़्यादा जटिल होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की नई State of Food Security and Nutrition…
सौर और पवन ऊर्जा हुई 100 गीगावाट पार, अब बिजली ग्रिड पर असली परीक्षा का वार
13 जुलाई को भारत के सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों ने कुछ समय के लिए 103.7 गीगावाट बिजली उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया। इसके दो दिन बाद, 15 जुलाई को यह उपलब्धि फिर दोहराई गई। उस दिन उत्पादन पहले 102.42 गीगावाट और फिर 100.9 गीगावाट तक पहुंचा। उसी दोपहर कुछ मिनटों के लिए देश…
चल पड़ी पहली हाइड्रोजन ट्रेन … मगर मंज़िल महज़ रेलवे नहीं
अगर मैं आपसे पूछूं कि भारत ने हाइड्रोजन ट्रेन क्यों बनाई, तो शायद पहला जवाब होगा. ताकि डीज़ल की जगह एक साफ़ ईंधन इस्तेमाल हो सके। जवाब सही है। लेकिन पूरी कहानी नहीं। असल सवाल यह है कि जब भारतीय रेलवे का लगभग पूरा ब्रॉडगेज नेटवर्क पहले ही बिजली से चलने लगा है, तो फिर…
क्यों हो रही है मुंबई में इतनी तेज़ बारिश? सिर्फ़ अल नीनो नहीं, जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह
इस साल मानसून ने भारत में अजीब तस्वीर पेश की है। जून के अंत तक देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। लेकिन जुलाई शुरू होते ही हालात तेजी से बदल गए। मुंबई और पश्चिमी तट के कई इलाकों में कुछ ही दिनों में इतनी बारिश हुई कि देशभर में बारिश की कमी…
वर्ल्ड बैंक ने हटाया 45% क्लाइमेट फाइनेंस लक्ष्य, क्या अब जलवायु अनुकूलन के लिए पैसा जुटाना होगा और मुश्किल?
जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सिर्फ़ लक्ष्य तय करना काफी नहीं होता। उसके लिए पैसा भी चाहिए। बाढ़ से बचाने वाले तटबंध बनाने हों। शहरों को भीषण गर्मी के लिए तैयार करना हो। सूखे का सामना करने वाली खेती विकसित करनी हो। या समुद्र किनारे बसे इलाकों को सुरक्षित बनाना हो। इन सबके लिए…
यूरोप में भी अब भारत जैसी गर्मी, जलवायु परिवर्तन ने जून की हीटवेव को बना दिया और खतरनाक
एक समय था जब भीषण गर्मी की खबरें ज़्यादातर भारत, पाकिस्तान या पश्चिम एशिया से आती थीं। यूरोप की पहचान अपेक्षाकृत ठंडे मौसम वाले महाद्वीप के रूप में होती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। इस साल जून के आखिरी दिनों में पश्चिमी यूरोप के कई हिस्सों में पड़ी रिकॉर्डतोड़ गर्मी को लेकर आई…
दिल्ली में तापमान 42 डिग्री था… लेकिन शरीर को लगा 51 डिग्री। आखिर ये नया ‘हीट इंडेक्स’ है क्या?
दिल्ली वालों ने पिछले कुछ दिनों में मौसम की खबरों में एक नया आंकड़ा सुना। “फील्स लाइक टेम्परेचर 50 डिग्री के पार पहुंच गया।” कई लोगों ने सोचा, “अरे… थर्मामीटर तो 42 डिग्री दिखा रहा है। फिर 50 डिग्री कहां से आ गया?” दरअसल, यहां कोई नया तापमान नहीं मापा जा रहा। थर्मामीटर अब भी…
भारत में सिर्फ गर्मी नहीं बढ़ रही, उमस भी शरीर को खतरनाक सीमा तक धकेल रही है
गर्मी पड़ती है तो लोग तापमान पूछते हैं। आज कितना पारा पहुंचा? 40 डिग्री?42 डिग्री?45 डिग्री? लेकिन कई बार असली खतरा उस संख्या में छिपा ही नहीं होता। क्योंकि शरीर सिर्फ तापमान नहीं महसूस करता। वह हवा में मौजूद नमी भी महसूस करता है। यही वजह है कि 38 डिग्री की उमस भरी दोपहर कई…